फिर भी ध्यान लगा-कर सुनने का’ नाटक करना पड़ता है.


पंडित की कथा और बीबी की व्यथा एक जैसी होती हैं…

समझ में ज्यादा कुछ नहीं आता,

फिर भी ध्यान लगा-कर सुनने का’ नाटक करना पड़ता है..!

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